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सोमवार, 11 अप्रैल 2022

जगत की वास्तविकता

 श्री गुरुवे नमः

जगत की वास्तविकता

नमस्ते,

जगत :  वस्तुओं का संग्रह जिसका अनुभव पंच ज्ञानेन्द्रियों से होता है    

वस्तुनिष्ठता : सब व्यक्तियों के अनुभव एकसमान है वह मान लेना, जैसे सब के पंचेन्द्रियों से होने वाले अनुभव में समानता होती है, एक सा दिखना, एक सा सुनाई देना, एक सी सुगंध आना, एक सा खाने का स्वाद और एक सा स्पर्श का अनुभव।

व्यक्तिनिष्ठ : जो व्यक्ति की इंद्रिया बताती है उस का अनुभव।  जैसे किसी की आँखों मे खराबी है तो उस को वह नहीं दिखाई देगा जो उस व्यक्ति को दिखाई देता है जिसकी आखें खराब नहीं है।

किसी भी नये साधक या आम व्यक्ति का, सब से बड़ा भ्रम, यह होता है कि जो भी जगत मे दिखाई पड़ता है, वह वास्तविक है।

आज जगत की वास्तविकता के बारे मे कुछ जानेंगे।